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स्कूल की लड़की – 3

तुम्हारी कसम जाने-मन, अब तो मेरे सपनो में भी प्रियंका चोपड़ा की जगह नंगी होकार तुम ही आने लगी हो. ‘वो’ तो अब मुझे तुम्हारे सामने कुछ भी नहीं लगती. सोने से पहले २ बार ख्यालों में तुम्हे पूरी नंगी करके चोद’ते हुए अपने लंड का रस निकलता हूँ, फिर भी सुबह मेरा ‘कच्छा’ गीला मिलता है. फिर सुबह बिस्टर से उठने से पहले तुम्हे एक बार जरूर याद करता हूँ.

मैंने सुना है की लड़कियों में चुदाई की भूख लड़कों से भी ज्यादा होती है. तुम्हारे अन्दर भी होगी न? वैसे तो तुम्हारी चुदाई करने के लिए सभी अपने लंड को तेल लगाये फिरते हैं; पर तुम्हारी कसम जानेमन, मैं तुम्हे सबसे ज्यादा प्यार करता हूँ, असली वाला. किसी और के बहकावे में मत आना, ज्यादातर लड़के चोदते हुए पागल हो जाते हैं. वो तुम्हारी कुंवारी चूत को एकदम फाड़ डालेंगे. पर मैं सब कुछ ‘प्यार से करूंगा.. तुम्हारी कसम. पहले उंगली से तुम्हारी चूत को थोड़ी सी खोलूँगा और चाट चाट कर अन्दर बहार से पूरी तरह गीली कर दूंगा.. फिर धीरे धीरे लंड अन्दर करने की कोशिश करूँगा, तुमने ख़ुशी ख़ुशी ले लिया तो ठीक, वरना छोड़ दूंगा.. तुम्हारी कसम जानेमन.

अगर तुमने अपनी चुदाई करवाने का मूड बना लिया हो तो कल अपना लाल रुमाल लेकर आना और उसको रेसस में अपने बेंच पर छोड़ देना. फिर मैं बताऊंगा की कब कहाँ और कैसे मिलना है!

प्लस जान, एक बार सेवा का मौका जरूर देना. तुम हमेशा याद रखोगी और रोज रोज चुदाई करवाने की सोचोगी, मेरा दावा है.

तुम्हारा आशिक!

लैटर में शुद्ध ‘कामरस’ की बातें पढ़ते पढ़ते चाचा का नशा कब काफूर हो गया,उन्होंने मुझे बहूत दांता..

खैर, हर रोज़ की तरह स्कूल के लिए तैयार होने का टाइम होते ही मेरी कासी हुयी छातियाँ फड़कने लगी; ‘शिकार’ की तलाश का टाइम होते ही उनमें अजीब सी गुदगुदी होने लग जाती थी. मैंने यही सोचा था की रोज़ की तरह रात की वो बात तो नशे के साथ ही चाचा के सर से उतर गयी होगी. पर हाय री मेरी किस्मत; इस बार ऐसा नहीं हुआ,” किसलिए इतनी फुदक रही है? चल मेरे साथ खेत में!”

“पर चाचा! मेरे एक्साम सर पर हैं!” बेशर्म सी बनते हुए मैंने रात वाली बात भूल कर उनसे बहस की.

चाचा ने मुझे ऊपर से नीचे तक घूरते हुए कहा,” ये ले उठा टोकरी! हो गया तेरा स्कूल बस! तेरी हाजिरी लग जाएगी स्कूल में! रामफाल के लड़के से बात कर ली है. आज से कॉलेज से आने के बाद तुझे यहीं पढ़ा जाया करेगा! तयारी हो जाये तो पेपर दे देना. अगले साल तुझे गर्ल’स स्कूल में डालूँगा. वहां दिखाना तू कच्छी का रंग!” आखिरी बात कहते हुए चाचा ने मेरी और देखते हुए जमीन पर थूक दिया.

काम करने की मेरी आदत तो थी नहीं. पुराना सा लहंगा पहने खेत से लौटी तो बदन की पोरी पोरी दुःख रही थी. दिल हो रहा था जैसे कोई मुझे अपने पास लिटाकर आते की तरह गूंथ डाले. मेरी ऊपर जाने तक की हिम्मत नहीं हुयी और नीचे के कमरे में चारपाई को सीधा करके उस पर पसरी और सो गयी.

रामफाल का लड़के ने घर में घुस कर आवाज दी. मुझे पता था की घर में कोई नहीं है. फिर भी मैं कुछ न बोली. दर-असल पढने का मेरा मनन था ही नहीं, इसीलिए सोने का बहाना किये पड़ी रही. मेरे पास आते ही वो फिर बोला,”अंजली!”

उसने २-३ बार मुझको आवाज दी. पर मुझे नहीं उठाना था सो नहीं उठी. हाय राम! वो तो अगले ही पल लड़कों वाली औकात पर आ गया. सीधा नितम्बों पर हाथ लगाकर हिलाया,”अंजली.. उठो न! पढना नहीं है क्या?”

इस हरकत ने तो दूसरी ही पढाई करने की ललक मुझमें जगा दी. उसके हाथ का अहसास पते ही मेरे नितम्ब सिकुड़ से गए. पूरा बदन उसके छूने से थिरक उठा था. उसको मेरे जाग जाने की ग़लतफ़हमी न हो जाये इसीलिए नींद में ही बद्बदाने का नाटक करती हुयी मैं उलटी हो गयी; अपने मांसल नितम्बों की कसावट से उसको ललचाने के लिए.

सारा गाँव उस चसमिश को शरीफ कहता था, पर वो तो बड़ा ही हरामी निकला. एक बार बहार नजर मार कर आया और मेरे नितम्बों से थोडा नीचे मुझसे सत्कार चारपाई पर ही बैठ गया. मेरा मुंह दूसरी तरफ था पर मुझे यकीन था की वो चोरी चोरी मेरे बदन की कामुक बनावट का ही लुत्फ़ उठा रहा होगा!………

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